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बुधवार, 12 नवंबर 2014

"पथरी" कैसे बनती !

पथरी कैसे बनती हैं, उसकी कितनी जातियां हैं. और उनके लक्षण क्या क्या होते ? इस प्रकार का प्रश्न होना स्वभाविक होता हैं.
पथरी की व्याख्या - नये घड़े में रखें हुए स्वच्छ पानी में भी जैसे कुछ समय के बाद कीच या जमी बारीक़ रेती का पावडर दीखता उसी प्रकार से मनुष्य शरीर में बस्ती रूप में पथरी जम जाती हैं,
जब आकाश में वायु और बिजली की अग्नि बाँध कर ओले बना देती हैं. वैसे ही बस्ती स्थान पर प्राप्त हुए वायु से युक्त पित्त जमा कर पथरी बना देते हैं.
 वृक्क में जब किसी कारण से यूरिक एसिड, युटेरस, आक्जेलेट्स इत्यादि लवण अधिक मात्राओं में उत्सर्जित होते हैं. तब मुत्रस्थ जलांश में इनका विलय होना कठिन हो जाता हैं. इसलिए उनका कुछ सूक्ष्म स्फटिक के रूप में गवीनी के उर्ध्व भाग में या बस्ती में अवक्षिप्त हो जाता हैं. और उनके चारो ओर लवण के कण संगठित होकर पथरी बन जाते हैं.
 पथरी या अश्मरी को अंग्रेजी भाषा में 'कैलकुलस" कहते हैं. अश्मा [ पत्थर ] के समान कठिन होने से इस बीमारी को अश्मरी या पथरी कहते हैं.
पथरी की उत्पति में प्रकार भेद के कारण भी अनेक होते हैं. तथापि संशोधन का अभाव और आहार-विहार का विकार से ही दो प्रधान कारण सामान्यता मिलते हैं. ............................................... बाकी समय मिलने पर अपडेट   

मंगलवार, 2 सितंबर 2014

पथरी

       पथरी होना हमारे जीवनशैली का अंग होता, क्योंकि हमारा शरीर का विकास और वृद्धि कारण आहार की गुणवत्ता से के साथ-साथ हमारे जीने के अंदाज़ भी सहायक होता हैं. हमारे जीने के अंदाज़ में आहार के पोषक तत्वों के पचने और पचानें में भी भिन्नता पाई जाती, कुछ हमारे आहार में विरोधी पोषक तत्वों का भी संग्रह होना  होता जिसमे पथरी भी वो एक हिस्सा हैं, जिसको यू भी समझा जाता की आहार के नकारात्मक प्रभाव का संग्रह होना ही पथरी बनने का कारण होता हैं.
      पथरी किसी कारणों से बनी हो उसका नैदानिक तरीका भी होता हैं, वैदिक जीवन या वैदिक चिकित्सा से पथरी का उपचार संभव होता हैं, आधुनिक चिकित्सा में शल्यचिकित्सा पर जोर दिया जाता परन्तु कुछ समय बाद में पथरी वापस हो जाती हैं, पथरी पित्ताश्मरी हो या गुर्दे की पथरी उपचार दोनों का संभव हैं, परन्तु आधुनिक भेड चाल में ऑपरेशन, ऑपरेशन के बावजूद फिर भी रोगी राहत नहीं, रोगी को वापस आहत ही मिलती हैं,
पित्ताश्मरी -
    पित्ताश्मरी का आधुनिक चिकित्सा से शल्यचिकित्सा ही की  जाती की पित्त की थैली को ही निकाल देते परन्तु मैं इस को गलत मानता हूँ, मैने देखा की किसी के आँख में मोतियाबिंद हैं और उस आँख को निकाल कर दूसरी बैठा देने से समस्या का समाधान मान कर शल्यचिकित्सा से आँख की पुतली को नया बैठा दिया, फिर भी नई आँख में भी वापस मोतियाबिंद शुरू हो गया जिसको आप इस  https://www.youtube.com/watch?v=4jyNMuEu8nc में देख सकते, जिस प्रकार से तपेदिक के मरीज़ को फेफड़ा में कफ की वृद्धि होने फेफड़ा नहीं निकला जाता हैं या बार-बार जुखाम होने से नाक को नहीं काटा जाता ठीक वैसे ही आप पित्ताशय को मत निकलवाइए, यथा योग्य चिकित्सक से परामर्श ले. अपनी आहार और जीवनशैली में  बदलाव लायें जिसमें आप को एक अच्छा स्वास्थ्य मिले और जीवन को भरपूर ख़ुशी का जिए. जानिए आप का दर्द का स्थान निम्नलिखित 1 से 6 संख्याओं में तो नहीं, अगर हा हैं, तो निकटतम चिकित्सक से परामर्श करे. अन्यथा हमसे सम्पर्क करे !  
समयावधि कम - समय मिलने पर अपडेट करूँगा .