काम = काम से कामनाएं ,इच्छा ,विचार ,कल्पनाए ,उपकल्पना की गति और मती का मिलन का मेला कही भ्रम ,कही सत्य ,कही राग या वैराग ,कही बल ,कही निर्बल ,कही खोने ,कही पाने भिन्न भिन्न प्रकार के विचार ही तो काम है .युवक को युवती की चाह की राह का एक विचार ,एक मिलन ,एक स्पर्श सुख की चाह ,पुत्र पाने की कल्पना ,एक वीर्य की शुक्ष्म बूंद से मानव का निर्माण ,मानव की विकास यात्रा भी तो एक काम की बिंदु से रेखा ,चिंगारी से आग की कामना और इन कामनाओ में गगन में तारो की भाती विचरण और इन का संकरा इक दिमागी रास्ता जिस प्रकार मकान पर चढने की सीढ़ियों का विचार की मकान पर चढा जाये का मात्र विचार बार बार आये और किसी से नही चढा जाये तो नकारात्मक प्रभाव ही तो काम का सकारात्मक स्वरूप होता है ,और किसी से चढा जाये तो सकारात्मक परन्तु वो जो चढा जाये उस को काम नही कहा जाता ,काम तो मात्र कल्पनाओ को कल्पनाओ के प्रतिबिंम्ब के प्रतिबिंम्ब में मात्र दर्शन है .और इन विचारों की श्रंखलाओ के टूटने पर गुस्सा,क्रोध का उत्पन्न होना ...
अपनी दिशा बदलो दशा अपने आप बदल जाएगी ,.. Change its direction will change on its own.. AAYURVED, MODREN, NUTRITION DIET & PSYCOLOGY गोपनीय ऑनलाइन परामर्श -- आपको हमारा परामर्श गोपनीयता की गारंटी है. हमारा ब्लॉग्स्पॉट, विश्वसनीय, सुरक्षित, और निजी है. एक उर्जावान, दोस्ताना, पेशेवर वातावरण में भौतिक चिकित्सा के लिए सर्वोत्तम संभव कार्यक्रम प्रदान करना है.
शनिवार, 26 मई 2012
काम = काम से कामनाएं ,इच्छा ,विचार ,कल्पनाए ,उपकल्पना की गति और मती का मिलन का मेला कही भ्रम ,कही सत्य ,कही राग या वैराग ,कही बल ,कही निर्बल ,कही खोने ,क
M.A. Psychology, DNYS, DNHE, CHMS, Aayurved Ratn, CBT/ERP Therapy और संपर्क नंबर 98290 85951
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें