काम = काम से कामनाएं ,इच्छा ,विचार ,कल्पनाए ,उपकल्पना की गति और मती का मिलन का मेला कही भ्रम ,कही सत्य ,कही राग या वैराग ,कही बल ,कही निर्बल ,कही खोने ,कही पाने भिन्न भिन्न प्रकार के विचार ही तो काम है .युवक को युवती की चाह की राह का एक विचार ,एक मिलन ,एक स्पर्श सुख की चाह ,पुत्र पाने की कल्पना ,एक वीर्य की शुक्ष्म बूंद से मानव का निर्माण ,मानव की विकास यात्रा भी तो एक काम की बिंदु से रेखा ,चिंगारी से आग की कामना और इन कामनाओ में गगन में तारो की भाती विचरण और इन का संकरा इक दिमागी रास्ता जिस प्रकार मकान पर चढने की सीढ़ियों का विचार की मकान पर चढा जाये का मात्र विचार बार बार आये और किसी से नही चढा जाये तो नकारात्मक प्रभाव ही तो काम का सकारात्मक स्वरूप होता है ,और किसी से चढा जाये तो सकारात्मक परन्तु वो जो चढा जाये उस को काम नही कहा जाता ,काम तो मात्र कल्पनाओ को कल्पनाओ के प्रतिबिंम्ब के प्रतिबिंम्ब में मात्र दर्शन है .और इन विचारों की श्रंखलाओ के टूटने पर गुस्सा,क्रोध का उत्पन्न होना ...
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शनिवार, 26 मई 2012
काम = काम से कामनाएं ,इच्छा ,विचार ,कल्पनाए ,उपकल्पना की गति और मती का मिलन का मेला कही भ्रम ,कही सत्य ,कही राग या वैराग ,कही बल ,कही निर्बल ,कही खोने ,क
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सोमवार, 2 अप्रैल 2012
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Human vision = Apparently the human body than human vision are five elements, water, air, fire, sky and earth is the sum of the deficiencies of the human body or the peace and revolution rate, positive or negative effects can be seen clearly, is to see straight into the body and soul. and the human body were seen in the comparative study of the Earth [Earth] is found in common. believed that the water element of the humanThe reason behind the blockage and the need to know the causes. stomach to fire and fire as the three are, matches the flame of the match, the flame of oil-filled lamps, and kitchen oven [cooking gas] in the flame,have effects on both body and soul. unknown reasons atom molecules with tan seeds grace to carry the burden of disease is too heavy on the mind.
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मानव दर्शन = मानव दर्शन देखा जाए तो इस मानव शरीर की तुलना पाच तत्वों से की जाती है ,जल ,वायु ,अग्नि ,आकाश तथा धरती के योग से इस मानव शरीर का निर्माण हुआ इस तत्वों की कमी या वृदि से शांति और क्रांति ,सकारात्मक या नकारात्मक प्रभाव साफ साफ देखा जा सकता,जो तन और मन में सीधा सीधा दर्शन होता है .और इस मानव शरीर का तुलनात्मक अध्यन में देखा गया की इस से प्रथ्वी [ धरती ] में भी समानता पाई जाती है .माना कि जल तत्व की मानव शरीर पर कमी या वृदि से कैसे प्रभाव पड़ता तो साफ तौर से देखा जाता की जब शरीर में जल की कमी होने पर शरीर का सुखना दीखता है और वृदि पर दमा जैसी बिमारिया दिखाई देती है अथवा बदन पर सुजन आदि, इन तत्वों के असमान संतुलन के पीछे क्या कारण और कहा पर रुकावट होती उन कारणों को जानना जरूरी है .पेट में अग्नि होती और अग्नि के भी तिन रूप होते है, माचिस के तीली की लौ , तेल भरी दीपक की लौ , और रसोई भट्टी [ रसोई गैस ] के लौ ,अब अगर इन को निरंतर जलना हो और मांग और पूर्ति में असंतुलन हो तो इन के असंतुलन बीज की अणु परमाणु के रूप की प्रवेश कब और कैसे हुआ व् इन के लाभ हानि का निवारण अज्ञात है तो दुखो का कारण बन जायेगा .इन पाच तत्वों का प्रभाव तन और मन दोनों पर पड़ता है .अज्ञात कारणों के अणु परमाणु के बीजो दुआरा तन के साथ मन पर भी भारी बीमारी का बोज ढोना पड़ता है .
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सोमवार, 26 मार्च 2012
mind and body philosophy
भारतीय जीवन दर्शन = भारतीय जीवन दर्शन बीज विज्ञानं से सुरु होता है .जो गर्भ में प्रवेस के पहले दो प्रकार उन सकारात्मक तथा नकारात्मक पहलुओ का समर्थन करता है.दिन और रात,अच्छा और बुरा ,जीवन और मौत , लाभ और हानि तथा जीवन में बीमारी और स्वाथ्य एक शिक्के के दो पहलुओ का वर्गीकरण इस प्रकार करता की नकारात्मक पहलू अपने आप उपज जाता जबकि सकारात्मक पहलू को निर्माण की आवश्यकता को निरंतर बनाए रखना पड़ता है. भारतीय जीवन मानसिक तथा शाररिक जीवन के निर्माण में अन्न की भूमिका को प्रधानता देता है की जैसा खाओगे अन्न वैसा होगा मंन... और मन के विचारो से ही ज्ञान विज्ञानं का विकास होता है .
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